प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धारा 151 बीएनएसएस/सीआरपीसी के तहत की जाने वाली निवारक कार्रवाई (Preventive Detention) को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में गिरफ्तार व्यक्ति को सामान्यतः केवल पर्सनल बॉन्ड पर छोड़ा जाना चाहिए और उससे जमानतदार (Surety) मांगना आवश्यक नहीं है। साथ ही पर्सनल बॉन्ड की राशि 20,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने पाया कि कई मामलों में लोगों को केवल इसलिए कई दिनों तक जेल में रखा जा रहा था क्योंकि वे जमानतदार उपलब्ध नहीं करा पा रहे थे। अदालत ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के विपरीत बताते हुए कहा कि धारा 151 का उद्देश्य शांति व्यवस्था बनाए रखना है, न कि लोगों को अनावश्यक रूप से जेल भेजना।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि व्यक्ति निर्धारित पर्सनल बॉन्ड भर देता है तो उसे तत्काल रिहा किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि पर्सनल बॉन्ड की राशि 20,000 रुपये से अधिक रखने की स्थिति में मजिस्ट्रेट को लिखित कारण दर्ज करने होंगे।
इसके अलावा, हाईकोर्ट ने अवैध हिरासत पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि 24 घंटे से अधिक की गैरकानूनी हिरासत की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को मुआवजा दिया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
शीर्षक:
धारा 151 में जेल नहीं, पर्सनल बॉन्ड पर रिहाई का निर्देश; बॉन्ड राशि 20 हजार से अधिक नहीं होगी : इलाहाबाद हाईकोर्ट
संवाददाता: चिराग शर्मा
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