लखनऊ:
उत्तर प्रदेश में आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि आर्थिक अपराधों से संबंधित मामलों को अधिकतम तीन माह के भीतर निस्तारित किया जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो।
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय धोखाधड़ी, निवेश घोटाले, साइबर फ्रॉड, फर्जीवाड़ा और अन्य आर्थिक अपराधों के मामलों में तेजी से कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने आधुनिक तकनीक और डिजिटल जांच प्रणालियों का अधिक से अधिक उपयोग करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तीन माह से अधिक समय तक जांच लंबित रखने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। इसके साथ ही जांच एजेंसियों को और अधिक सक्षम एवं तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के निर्देश भी दिए गए।
सरकार का मानना है कि इस पहल से आर्थिक अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा, निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
मुख्य बिंदु:
- आर्थिक अपराध के मामलों का निस्तारण तीन माह में होगा।
- लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश।
- साइबर फ्रॉड, निवेश घोटाले और वित्तीय धोखाधड़ी पर विशेष फोकस।
- तीन माह से अधिक जांच लंबित रखने पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
- जांच एजेंसियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर जोर।
संवाददाता: चिराग शर्मा
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