वॉशिंगटन। अमेरिका की एक संघीय अदालत ने एच-1बी वीजा से जुड़े उस नियम को खारिज कर दिया है, जिसके तहत विदेशी पेशेवरों के लिए उच्च वेतन मानक तय करने का प्रस्ताव रखा गया था। अदालत के इस फैसले को भारतीय आईटी सेक्टर और विदेशी कुशल कर्मचारियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रशासन द्वारा लागू की गई नीति निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं थी। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि ऐसे महत्वपूर्ण बदलावों को लागू करने से पहले सार्वजनिक सुझाव और आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था।
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी नौकरियों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से एच-1बी वीजा कार्यक्रम में कई बदलाव प्रस्तावित किए थे। इनमें विदेशी कर्मचारियों के लिए वेतन स्तर बढ़ाने का प्रावधान भी शामिल था। आलोचकों का कहना था कि इससे कंपनियों के लिए विदेशी प्रतिभाओं की भर्ती कठिन हो जाती।
विशेषज्ञों के अनुसार अदालत का यह फैसला उन हजारों पेशेवरों के लिए राहत लेकर आया है जो एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका में काम कर रहे हैं। भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों की बड़ी संख्या इस वीजा श्रेणी के तहत अमेरिका में कार्यरत है, इसलिए इस निर्णय का प्रभाव भारत पर भी देखने को मिल सकता है।
टेक उद्योग से जुड़े संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे कंपनियों को वैश्विक प्रतिभाओं तक पहुंच बनाए रखने में मदद मिलेगी। वहीं, कानूनी जानकारों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में वीजा नीतियों को लेकर सरकारों के अधिकारों और सीमाओं को भी स्पष्ट करता है।
हेडलाइन: एच-1बी वीजा नियम पर अदालत की रोक, विदेशी पेशेवरों को मिली बड़ी राहत
संवाददाता: चिराग शर्मा
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